प्रिय एनटीबीसीएल शेयरधारकों / हितधारकों,

वित्त वर्ष 2024-25 एनटीबीसीएल के लिए एक घटनाओ से भरा हुआ और क्रियाशील वर्ष रहा है जिसमें कई महत्वपूर्ण कॉरपोरेट, कानूनी और नियामक विकास हुए है। इन घटनाओं ने हमारे हितधारकों के बीच अनेक प्रश्नों और विविध व्याख्याओं को जन्म दिया है।

कंपनी ने अपनी आय में लगभग 100 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है और तक़रीबन 23,000 करोड़ रुपये से अधिक के कर संबंधी विवाद को पूरी तरह से ख़त्म कर दिया है जो कि अब लगभग शून्य रह गया हैं।

अपने कॉरपोरेट और न्यासीय उत्तरदायित्व को निभाने के लिए हमें प्रतीत होता है कि हमें इस परियोजना की जटिलता और कानूनी कार्यवाहियों को ध्यान में रखते हुए कुछ प्रमुख मुद्दों को स्पष्टता और तथ्यों के साथ संबोधित करना आवश्यक है।

इसी उद्देश्य से हमने इस दस्तावेज़ में कुछ सबसे अधिक बार पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर दिए हैं। क्योंकि हम इसे अपने हितधारकों के साथ अपनी सहभागिता और पारदर्शिता को और मज़बूत करने के अवसर के रूप में देखते हैं।

एनटीबीसीएल अपने शेयरधारकों के साथ निरंतर संवाद के लिए प्रतिबद्ध है और हम डीएनडी फ्लाईवे से संबंधित अतिरिक्त प्रश्न प्राप्त करने के लिए तैयार हैं।

कानूनी और नियामक सीमाओं के अंतर्गत रहते हुए हम हर संभव प्रयास करेंगे कि सभी प्रश्नों का उत्तर स्पष्ट, तथ्यपरक और रचनात्मक रूप से दिया जाए, ताकि कंपनी, उसके भागीदारों, उपयोगकर्ताओं, लेनदारों, शेयरधारकों और आम जनता के दीर्घकालिक हितों की रक्षा हो सके।

सादर
धीरज कुमार
मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सीईओ, एनटीबीसीएल



पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बावजूद, एनटीबीसीएल के पास अपना पक्ष रखने के लिए आगे सुधारात्मक याचिकाएँ दायर करने का कानूनी विकल्प मौजूद है, जिसमें भारतीय कानून के तहत उपलब्ध स्पष्टीकरण याचिका भी शामिल है। महत्वपूर्ण बात यह है कि न्यायालय के पहले के निर्णय मुख्य रूप से जनहित संबंधी मुद्दों पर केंद्रित थे, न कि एनटीबीसीएल, (कन्सेशनर) और नोएडा प्राधिकरण (कन्सेशनिंग अथॉरिटी) के आपसी अधिकारों और हितों पर। एनटीबीसीएल के पास उचित फाइलिंग के माध्यम से नए कानूनी उपाय तलाशने और/या नोएडा के साथ शेष मुददों पर समाधान करने के लिए बातचीत करने का पूरा अधिकार है। एनटीबीसीएल सभी उपलब्ध कानूनी उपायों / समाधानों का मूल्यांकन कर रहा है, जिसमें शेयरधारकों का संरक्षण, सरकारी अनुबंधों की पवित्रता और निजी निवेशको का विश्वास जैसे कुछ पहलू शामिल हैं - जो नए और स्वतंत्र फाइलिंग का आधार बन सकते हैं। बोर्ड सभी शेयरधारकों के सर्वोत्तम हित में कार्य करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है, जिसमें 60,000 से अधिक शेयरधारक शामिल हैं, जिनके पास कंपनी में लगभग 70 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
नहीं। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कन्सेशन एग्रीमेंट को समाप्त नहीं किया है। वास्तव में, टोल बंद करने की पुष्टि करते हुए न्यायालय ने माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश को इस हद तक बरकरार रखा है जिसमें कन्सेशन एग्रीमेंट के अनुच्छेद 14, (जो परियोजना की वापसी (प्रोजेक्ट रिटर्न) की गणना सूत्र से संबंधित है) को अलग करते हुए शेष कन्सेशन एग्रीमेंट को वैध माना गया है। न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अनुबंध अमान्य क्लॉज़ के बिना भी साँस ले सकता है और जीवित रह सकता है। न्यायालय ने जानबूझकर कन्सेशन एग्रीमेंट को पूरी तरह से रद्द नहीं करने का फैसला लिया जिसका अर्थ है यह कि कन्सेशन वैध बना रहेगा और सक्रिय रहेगा।
बिल्कुल नहीं। टोल लगाना कन्सेशन एग्रीमेंट का केवल एक भाग है, जिसे न्यायालय ने जनहित में समाप्त कर दिया है। हालाँकि, कन्सेशन एग्रीमेंट की अवधि अनुबंध के अलग प्रावधानों द्वारा नियंत्रित होती है। न्यायालयों ने कहीं भी कन्सेशन एग्रीमेंट को समाप्त करने का कोई निर्देश नहीं दिया है।
नोएडा को कन्सेशन एग्रीमेंट में उल्लिखित विशिष्ट परिस्थितियों में कन्सेशन को समाप्त करने पर विचार करने का संविदात्मक अधिकार है। हालाँकि, ऐसा कोई भी कदम कन्सेशन एग्रीमेंट की शर्तों के अनुसार समाप्ति के प्रावधानों को लागू करेगा। एनटीबीसीएल यह सुनिश्चित करेगा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से कन्सेशन एग्रीमेंट में उल्लिखित कानूनी, प्रक्रियात्मक और वित्तीय दायित्वों के अनुरूप हो। समाप्ति मनमानी नहीं हो सकती, और विशेष रूप से अनुमानित । इसे स्पष्ट रूप से कन्सेशन एग्रीमेंट की शर्तों के अनुरूप कानूनी रूप से उचित और आनुपातिक होना चाहिए। हम समाधान और बातचीत के लिए हमेशा तैयार हैं, लेकिन अपने संविदात्मक अधिकारों और कंपनी और उसके 60,000 से अधिक शेयरधारकों के हितों की पूरी तरह से रक्षा करेंगे।
कन्सेशन एग्रीमेंट में परियोजना को बीच में ही सौंपने का कोई प्रावधान नहीं है। कन्सेशन को या तो निर्धारित परिस्थितियों में समाप्त किया जा सकता है या उसे अपनी पूरी संविदा अवधि तक चलने दिया जा सकता है। माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय , और फिर उसके बाद माननीय सर्वोच्च न्यायालय , ने केवल टोलिंग के पहलू को सम्बोधित किया, न कि कन्सेशन की निरंतरता या समाप्ति को । एनटीबीसीएल कन्सेशन अवधि के अंत तक वैध संविदात्मक अधिकारों और जिम्मेदारियों को बरकरार रखेगा और परियोजना परिसंपत्ति पर एकतरफा अधिग्रहण के किसी भी प्रयास का कड़ा विरोध करेगा। हम रचनात्मक सहयोग के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन परियोजना की कानूनी, वित्तीय, और परिचालन अखंडता की पूरी दृढ़ता से रक्षा करेंगे।
पर्याप्त लाभ शब्द की अभिव्यक्ति एक अत्यधिक विनियमित इंफ्रास्ट्रक्चर के मॉडल को अति-सरल बना देता है। एनटीबीसीएल की आय एक पारदर्शी, पूर्व स्वीकृत कन्सेशन एग्रीमेंट द्वारा नियंत्रित होती थी जो रिटर्न को सीमित करती थी, उसे किये गए निवेश से जोड़ती थी, और परियोजना को कई सरकारी और वित्तीय संस्थाओं की निगरानी के अधीन रखती थी।

कोई भी अप्रत्याशित लाभ नहीं हुआ था, यहाँ तक कि अप्रत्याशित लाभ हो ही नहीं सकता था, क्योंकि टोल मे किसी भी वृद्धि को अनुमोदित करने की प्रक्रिया पर संयुक्त स्वीकृति का होना आवश्यक था, और कंपनी के पास यातायात की मात्रा सुनिश्चित करने की कोई क्षमता नहीं थी जो लाभप्रदता या किसी विशेष वित्तीय परिणाम को सुनिश्चित कर सके।

यह इस तथ्य से सिद्ध होता है कि कंपनी ने वर्ष 2000-2009 की अवधि के दौरान लगातार घाटा दर्ज किया और अपनी शुद्ध संपत्ति (नेट वर्थ) में गिरावट दर्ज की, जो कि अनुमानों की तुलना में वास्तविक कम यातायात मात्रा के कारण था। इतनी खराब वित्तीय स्थिति और लंबी चुनौतियों के बावजूद, कंपनी ने न तो परियोजना को छोड़ा और न ही किसी सरकारी अनुदान की मांग की, बल्कि उस परियोजना परिसंपत्ति का रखरखाव और संचालन जारी रखा, जिसका निर्माण उस श्रेणी के सर्वश्रेष्ठ निर्माणकर्ता / ईपीसी ठेकेदारों (जापानी कंपनियों का एक संघ) द्वारा किया गया था, वो भी बिना किसी सार्वजनिक निधि / सरकारी अनुदान के।

यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि 15 अक्टूबर, 2018 को कंपनी पर 45 करोड़ रुपये का सुरक्षित ऋण और 19 करोड़ रुपये का असुरक्षित ऋण बक़ाया था। यह तथ्य किसी भी सार्वजनिक दावे को झूठा साबित कर देगा कि कंपनी ने परियोजना लागत वसूल कर ली थी या उस मामले में, पर्याप्त लाभ कमा लिया था। संयोग से, अगर माननीय एनसीएलएटी द्वारा आईएलएंडएफएस समाधान प्रक्रिया के अंतर्गत ब्याज स्थगन अवधि का लाभ न मिला होता, तो 30 जून, 2025 को कंपनी का बकाया ऋण 64 करोड़ रुपये (15 अक्टूबर, 2018 तक) से बढ़कर लगभग 138 करोड़ रुपये (30 जून, 2025 तक) हो गया होता।
यह महत्वपूर्ण है कि एक वर्ष के लेखा लाभ और कंपनी की दीर्घकालीन वित्तीय स्थिति के बीच अंतर को समझा जाए, जो परियोजना रिटर्न से जुड़ी होती है।

इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में पूंजी निवेश करने वाले निवेशकों को रिटर्न प्राप्त करने का अधिकार होता है। यदि आप एनटीबीसीएल के निवेश रिटर्न की गणना करें, जो वर्ष 2000 के आसपास किए गए निवेश (निर्माण अवधि को छोड़कर) थे, तो लाभांश के बावजूद वार्षिक रिटर्न केवल एक अंक में रहा है, जो बाजार बेंचमार्क से काफी कम है। यह भी ध्यान में रखा जाना चाहिए कि वर्ष 2000-2010 तक और वर्ष 2016 से अब तक कोई भी लाभांश नहीं दिया गया है।

इसके अतिरिक्त कंपनी की शुद्ध संपत्ति (नेट वर्थ) केवल वर्ष 2000-2009 के दौरान काफी कम हो गई थी, मुख्यतः अनुमानित यातायात प्रवाह के पूरा न होने के कारण, और वर्ष 2010-11 से ही कंपनी ने मामूली लाभ कमाना प्रारम्भ कर दिया था।

कुल मिलाकर 205 करोड़ रुपये का लाभांश वर्ष 2010-11 से वर्ष 2015-16 के बीच, वर्ष 2000 में निवेशित 186 करोड़ रुपये की पूंजी पर वितरित किया गया था, जिसका अर्थ यह है कि वर्ष 2000 में किए गए 186 करोड़ रुपये के निवेश के समय मूल्य को ध्यान में रखते हुए, निवेशकों को प्रभावी रूप से भारी नुकसान उठाना पड़ा।

उल्लेखनीय रूप से, परियोजना का संपूर्ण जोखिम कंपनी द्वारा वर्ष 2000 से वर्ष 2010 तक और फिर वर्ष 2010 से अपने शेयरधारकों के साथ संयुक्त रूप से एकल अंकों के नाममात्र रिटर्न के लिए अंडरराइट किया गया था, जो कन्सेशन एग्रीमेंट के तहत परिभाषित परियोजना रिटर्न की वसूली से काफी कम है।

न्यायालय के फैसले के बाद शेयर की कीमत में तेज़ी से गिरावट आई है, जिससे दीर्घकालिक निवेशकों की संपत्ति प्रभावित हुई है। उस समय लाभांश संबंधी निर्णय कंपनी अधिनियम, वित्तीय विवेक और उपलब्ध वितरण योग्य रिज़र्व के अनुसार लिए गए थे, न कि केवल किसी एक वित्तीय वर्ष के घोषित लाभ के आधार पर। ये लाभांश सभी वैधानिक दायित्वों और बोर्ड की मंज़ूरियों को पूरा करने के बाद घोषित किए गए थे, और संचित अधिशेष (सरप्लस) से लिए गए थे।
हम न्यायालय की टिप्पणी का सम्मान करते हैं। हालाँकि, तथ्य यह है कि 30 जून, 2025 तक 43 करोड़ रुपये का बकाया ऋण और 74 करोड़ रुपये का गैर-अर्जित ब्याज, किसी भी तरह से यह नहीं दर्शाता कि कंपनी ने पर्याप्त मुनाफा कमा लिया है। वास्तव में, ब्याज स्थगन और बकाया ऋण की अदायगी न करने से कंपनी को 2018 से चलते रहने के लिए एक जीवन रेखा मिली है।

दावों के आधार पर, न्यायालय की ये धारणा रही है कि एनटीबीसीएल ने अपना प्रारंभिक निवेश वसूल कर लिया है और पर्याप्त लाभ भी कमा लिया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि कंपनी ने परियोजना की कुल लागत वसूल कर ली है, जिसमें संचालन और रखरखाव की लागत भी शामिल होगी और हम कन्सेशन के तहत परिकल्पित रिटर्न की बिल्कुल भी बात नहीं कर रहे हैं। परिभाषित वसूली / रिटर्न केवल अनुच्छेद 14 में उल्लिखित सूत्र का प्रयोग करके ही निर्धारित की जा सकती है, जिसे अब न्यायालय ने स्वयं आय के प्रमुख स्रोत, अर्थात् टोलिंग को समाप्त करके, कन्सेशन के तहत परिकल्पित आय के अन्य स्रोतों की खोज की अनुमति दिए बिना, समाप्त कर दिया है।
एनटीबीसीएल न्यायालयों और सीएजी की संस्था का सम्मान करता है। सीएजी रिपोर्ट वर्ष 2017 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय को सौंपी गई थी, जो परियोजना की लागत और रिटर्न की वसूली न होने की ओर इशारा करती है।

सीएजी को स्वतंत्र लेखा परीक्षक (इंडिपेंडेंट ऑडिटर) की रिपोर्ट की जाँच करने का अधिदेश था, और यह सुनिश्चित करना था कि क्या कंपनी ने कन्सेशन एग्रीमेंट की शर्तों के अनुसार परियोजना से रिटर्न कमा लिया है, और यह संयोग से एक सुपरिभाषित और सीमित अधिदेश था।

हालाँकि, हम समझते हैं कि इस अधिदेश को लागू करते समय - विशेष रूप से परियोजना की लागत और रिटर्न का निर्धारण करने के लिए - वास्तविक लागत, व्यय और आय का उपयोग करने के बजाय - कुछ अनुमानित या समायोजित आंकड़ों का उपयोग किया गया था और रिटर्न या वसूली में कमी की गणना इन आंकड़ों के आधार पर की गई थी।

यहां तक की इस पद्धति से सुनिश्चित / गणना (जो आवश्यक रूप से अनुभवजन्य या नैदानिक नहीं है) करने के बाद भी, यह निष्कर्ष निकाला गया (हालाँकि बहुत छोटे पैमाने पर) कि कंपनी को अभी भी अपनी परियोजना लागत की भरपाई करनी है।

अंतिम निर्णय केवल एक पहलू - सीएजी रिपोर्ट, के आधार पर लिया गया, जिसमें कन्सेशन के स्थायी होने की काल्पनिक संज्ञा - सबसे खराब स्थिति को शामिल किया गया है, वास्तविक निवेश जोखिम, वास्तविक लागत / व्यय, वास्तविक आय, संविदात्मक प्रतिबद्धताओं, दीर्घकालिक रखरखाव, दायित्वों और विशेष रूप से संविदात्मक रूप से सहमत अन्य स्रोतों के माध्यम से राजस्व सुरक्षा उपायों को ध्यान में रखे बिना, जो कभी प्रदान ही नहीं किए गए, एक विकृत मूल्यांकन का परिणाम है जो निवेशकों के दीर्घकालिक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में विश्वास को कम करता है।
हाँ, फ्लाईवे से सटी ज़मीन कानूनी और संविदात्मक रूप से परियोजना की संपत्ति का हिस्सा है। इसमें बफर ज़ोन, पहुँच मार्ग, आपातकालीन स्थान और इंफ्रास्ट्रक्चर गलियारे शामिल हैं। इसे राजस्व में कमी की स्थिति में पुनर्विकास के लिए चिह्नित किया गया था। इसलिए यह अधिशेष भूमि नहीं है। यह परियोजना की वित्तीय और परिचालन स्थिरता का एक अभिन्न हिस्सा है। कन्सेशन की शर्तों को पूरा किए बिना इस ज़मीन का अधिग्रहण या पुनर्आवंटन संभव नहीं है और ऐसा कोई भी प्रयास कानूनी रूप से अस्वीकार्य होगा और निवेशकों और भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर के इतिहास में उनके विश्वास को नुकसान पहुंचाने वाला होगा।
नोएडा विज्ञापन नीति, नोएडा के स्वामित्व और उसके द्वारा संचालित और रखरखाव वाले मार्गों पर लागू होती है। डीएनडी फ्लाईवे एक निजी तौर पर विकसित और रखरखाव वाला मार्ग है, जिसमें नोएडा एक अल्पसंख्यक शेयरधारक के साथ - साथ कन्सेशनिंग अथॉरिटी है। नोएडा की डीएनडी फ्लाईवे के संचालन या उसके रखरखाव में कोई भूमिका नहीं है, और न ही कोई इसका वास्तविक स्वामित्व है। एनटीबीसीएल सभी संरचनात्मक सुरक्षा मानदंडों का पालन करता है और विज्ञापन से प्राप्त राजस्व, नोएडा के साथ साझा करने के बाद, फ्लाईवे के रखरखाव में प्रयोग करता है।
हाँ। कन्सेशन एग्रीमेंट के सह-लेखक के रूप में - जिसे नोएडा के साथ व्यापक विचार-विमर्श करके और कई प्राधिकरणों / संस्थाओं से प्राप्त प्रतिक्रिया के बाद तैयार और निष्पादित किया गया था । नोएडा को इसके निष्पादन के समय, 2016 में या इस स्तर पर, अनुबंध को स्वीकार और पुष्टि नहीं करने वाला नहीं माना जा सकता। इसकी निरंतर संलग्नता और किसी भी औपचारिक अस्वीकृति का अभाव, इस स्वीकृति को पुष्ट करता है।

दिलचस्प बात यह है, कि नोएडा के प्रतिनिधियों को एनटीबीसीएल के बोर्ड में नामित निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था और ऐसे प्रतिनिधियों ने लगभग वर्ष 2010 तक निदेशक के रूप मे और वर्ष 2014 तक विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में बोर्ड की कार्यवाहियों में भाग लिया था।

कंपनी के बोर्ड में निदेशक के रूप में, ऐसे प्रतिनिधियों ने पिछले कई वर्षों तक बैलेंस शीट पर हस्ताक्षर किए थे।

इसके अतिरिक्त, माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश से पहले, नोएडा ने अपनी इच्छा से कभी भी कन्सेशन एग्रीमेंट की शर्तों के विरुद्ध किसी भी न्यायिक मंच का रुख नहीं किया।

वास्तव में, स्वतंत्र लेखा परीक्षकों और स्वतंत्र इंजीनियरों की नियुक्ति एनटीबीसीएल और नोएडा द्वारा संयुक्त रूप से की गई थी। इसके अलावा किराया संशोधन समिति में नोएडा के प्रतिनिधि शामिल थे और टोल बढ़ाने का कोई भी निर्णय नोएडा के प्रतिनिधियों की भागीदारी और अनुमोदन से लिया जाता था।
यह सबसे गंभीर मुद्दों में से एक है। यदि कानूनी रूप से निष्पादित, नीति-समर्थित, और सरकार द्वारा अनुमोदित, अनुबंध को बीच में ही बदला जा सकता है, तो यह सभी सार्वजनिक-निजी भागीदारी में अनिश्चितता पैदा करता है। यद्यपि सार्वजनिक हित सर्वोपरि है, लेकिन यह वाणिज्यिक अनुबंधों की कानूनी पवित्रता को कम करने की कीमत पर नहीं होना चाहिए। ऐसा करने से इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना में निवेश के क्षेत्र में भारत की विश्वसनीयता को गंभीर नुकसान पहुँच सकता है।
सही काम करते रहकर। टोल वसूली बंद होने के बावजूद, हम अपनी ज़िम्मेदारी से पीछे नहीं हटे। डीएनडी फ्लाईवे, सवारी की गुणवत्ता, स्वच्छता, सुरक्षा और प्रबंधन के मामले में, अपनी श्रेणी में आज भी सर्वश्रेष्ठ बना हुआ है। उत्कृष्टता के प्रति इसी प्रतिबद्धता से हमने जनता का विश्वास बनाए रखा हैं ।
एनटीबीसीएल डीएनडी फ्लाईवे का मालिक और कन्सेशनर है और हम ज़िम्मेदारी से प्रबंधन करने में विश्वास रखते हैं। वर्ष 2023 के दौरान, एनटीबीसीएल ने डीएनडी फ्लाईवे के पुनर्वास पर पहले ही 6 करोड़ रुपए खर्च कर दिए है। इसके अलावा, 5 करोड़ रूपए आगे चल रहे पुनर्वास और भविष्य मे रखरखाव के लिए निर्धारित किए गए हैं। ये खर्च संचालन के दौरान होने वाले दैनिक रखरखाव के खर्च के अतिरिक्त हैं, और वित्तीय संकट और टोल राजस्व न होने के बावजूद भी खर्च किए जा रहे हैं। हमने सार्वजनिक सुरक्षा, नागरिक उत्तरदायित्व और परिसंपत्ति अखंडता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के तहत विश्व स्तरीय मानकों के अनुरूप डीएनडी मार्ग को निरंतर बनाए रखा है।
एनटीबीसीएल के 60,000 से ज़्यादा पब्लिक शेयरधारक हैं, जिनके पास कंपनी की लगभग 70 प्रतिशत हिस्सेदारी है। कंपनी ने हमेशा देश के कानूनी और नीतिगत ढाँचों के भीतर रहकर काम किया है। हम सभी विकल्पों की खोज कर रहे हैं, ताकि शेयरधारकों के मूल्यों की रक्षा की जा सके और निवेशकों का विश्वास बहाल हो सके और भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर वित्तपोषण पारिस्थितिकी तंत्र की अखंडता को बनाए रखा जा सके।
यह एक मुख्य चिंता का विषय है। एनटीबीसीएल ने हर कानूनी और नीतिगत प्रक्रिया का पालन किया। सभी अनुमतियाँ प्राप्त कीं – वित्तीय, प्रशासनिक, पर्यावरणीय और कानूनी - जब कन्सेशन प्रदान किया गया। बाद में न्यायिक दृष्टिकोण - कि सरकार के पास अधिकार का अभाव था, पूर्वव्यापी रूप से उस आधार को ही बदल देता है जिस पर विश्वाश करके निवेशकों ने निवेश किया था। यह सरकार समर्थित अनुबंधों की भविष्यवाणी और प्रवर्तनीयता के बारे में महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है, जिस पर हमारा मानना है कि इस पर भारत के निवेश माहौल के स्वास्थ्य के लिए संबोधित किया जाना चाहिए।
एनटीबीसीएल का गठन एक सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तौर पर डीएनडी फ्लाईवे परियोजना को पूरा करने के लिए किया गया था, जो अपने समय की एक अग्रणी शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर पहल थी, ऐसी परियोजनाओं को शुरू करने के लिए एक अलग एसपीवी का गठन करना एक आवश्यक मानदंड था और पीपीपी ढांचे के तहत लागू इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में एक मानक अभ्यास बना हुआ था। ऐसे मामलों में प्रमोटर का अनुभव महत्वपूर्ण होता है न कि एसपीवी का।
हालांकि कंपनी अधिनियम और अन्य लागू कानून पब्लिक शेयरधारकों के लिए संरचित और अंशांकित निकास (जैसे बायबैक) की अनुमति देते हैं, एनटीबीसीएल और इसके प्रमोटर्स – आईएलएंडएफएस, अपनी चल रही समाधान प्रक्रिया के तहत और कंपनी के राजस्व में उल्लेखनीय गिरावट के कारण ऐसे किसी भी निकास विकल्प की पेशकश करने की स्थिति में नहीं हैं।
एनटीबीसीएल ने नोएडा के आर्थिक और सामाजिक विकास को उत्प्रेरित करने में एक आधारभूत भूमिका निभाई है। डीएनडी फ्लाईवे का निर्माण करके, हमने दिल्ली और नोएडा के बीच एक निर्बाध, उच्च गति वाला संपर्क प्रदान किया है, जिससे यात्रा का समय काफी कम हो गया है और नोएडा में आवासीय, वाणिज्यिक और आईटी केंद्रों के विकास को बढ़ावा मिला है। डीएनडी फ्लाईवे, लाखों दैनिक यात्रियों के लिए जीवन रेखा बन गया और इसने नोएडा को एनसीआर के व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र में एकीकृत करने में मदद की है। इसने इंफ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट और व्यावसायिक विकास को बढ़ावा दिया है जिससे नोएडा एक जीवंत शहरी केंद्र में बदल गया है। हमारी परियोजना केवल एक मार्ग नहीं थी - यह क्षेत्रीय परिवर्तन के लिए उत्प्रेरक थी।
मुफ्त इंफ्रास्ट्रक्चर आदर्श लग सकता है। लेकिन सच तो यह है कि कोई भी मुफ़्त इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं हो सकता, क्योंकि या तो उपयोगकर्ता या लाभार्थी इसके लिए भुगतान करते हैं या आम तौर पर करदाताओं को इसके लिए भुगतान करना पड़ता है और अगर यह न तो करदाताओं के पैसे से समर्थित है और न ही उपयोगकर्ता के शुल्कों से वसूला जाता है, तो ऐसी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएँ बनी नहीं रह सकतीं। डीएनडी जैसे मामलों में - जो खुद निजी पूंजी से निर्मित है, न कि किसी सरकारी बजटीय सहायता से - बिना किसी वैकल्पिक और विश्वसनीय राजस्व स्रोत के इसे मुफ़्त बनाना, इसे अस्थायी सार्वजनिक सेवा और परिसंपत्ति की गुणवत्ता में गिरावट की ओर ले जाएगा। ऐसे उदाहरण भविष्य में किसी भी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना में निजी निवेश को हतोत्साहित कर सकते हैं, जिसकी भारत को सख्त ज़रूरत है। यह अंततः दीर्घकालिक सार्वजनिक हित को नुकसान पहुंचाएगा।