पर्याप्त लाभ शब्द की अभिव्यक्ति एक अत्यधिक विनियमित इंफ्रास्ट्रक्चर के मॉडल को अति-सरल बना देता है। एनटीबीसीएल की आय एक पारदर्शी, पूर्व स्वीकृत कन्सेशन एग्रीमेंट द्वारा नियंत्रित होती थी जो रिटर्न को सीमित करती थी, उसे किये गए निवेश से जोड़ती थी, और परियोजना को कई सरकारी और वित्तीय संस्थाओं की निगरानी के अधीन रखती थी।
कोई भी अप्रत्याशित लाभ नहीं हुआ था, यहाँ तक कि अप्रत्याशित लाभ हो ही नहीं सकता था, क्योंकि टोल मे किसी भी वृद्धि को अनुमोदित करने की प्रक्रिया पर संयुक्त स्वीकृति का होना आवश्यक था, और कंपनी के पास यातायात की मात्रा सुनिश्चित करने की कोई क्षमता नहीं थी जो लाभप्रदता या किसी विशेष वित्तीय परिणाम को सुनिश्चित कर सके।
यह इस तथ्य से सिद्ध होता है कि कंपनी ने वर्ष 2000-2009 की अवधि के दौरान लगातार घाटा दर्ज किया और अपनी शुद्ध संपत्ति (नेट वर्थ) में गिरावट दर्ज की, जो कि अनुमानों की तुलना में वास्तविक कम यातायात मात्रा के कारण था। इतनी खराब वित्तीय स्थिति और लंबी चुनौतियों के बावजूद, कंपनी ने न तो परियोजना को छोड़ा और न ही किसी सरकारी अनुदान की मांग की, बल्कि उस परियोजना परिसंपत्ति का रखरखाव और संचालन जारी रखा, जिसका निर्माण उस श्रेणी के सर्वश्रेष्ठ निर्माणकर्ता / ईपीसी ठेकेदारों (जापानी कंपनियों का एक संघ) द्वारा किया गया था, वो भी बिना किसी सार्वजनिक निधि / सरकारी अनुदान के।
यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि 15 अक्टूबर, 2018 को कंपनी पर 45 करोड़ रुपये का सुरक्षित ऋण और 19 करोड़ रुपये का असुरक्षित ऋण बक़ाया था। यह तथ्य किसी भी सार्वजनिक दावे को झूठा साबित कर देगा कि कंपनी ने परियोजना लागत वसूल कर ली थी या उस मामले में, पर्याप्त लाभ कमा लिया था। संयोग से, अगर माननीय एनसीएलएटी द्वारा आईएलएंडएफएस समाधान प्रक्रिया के अंतर्गत ब्याज स्थगन अवधि का लाभ न मिला होता, तो 30 जून, 2025 को कंपनी का बकाया ऋण 64 करोड़ रुपये (15 अक्टूबर, 2018 तक) से बढ़कर लगभग 138 करोड़ रुपये (30 जून, 2025 तक) हो गया होता।